तुम्हारे इक
छोटे से दुख से
कभी जो
मेरा मन भर आये
ढुलक पड़े
आँखों से मोती
सीमा तोड़ कर
बह जाये
तो ज़रा देर
उँगली पर अपने
दे देना
रुकने को जगह तुम