20/06: नागरिक के नाते
Category: General
Posted by: Sushil Bansal
देश की कई में बुरी स्थिति हम-आपको कई बार आक्रोशित करती है.निश्चित तौर पर हमें गुस्सा आना भी चाहिए.भ्रष्टाचार,अव्यवस्था और अनैतिकता यदि हमें आक्रोशित नही करते तो यह अच्छा नही कहा जा सकता.किंतु केवल कुड कर राह जाना भी अच्छा नही है.एक नागरिक के नाते हमें अपने आसपास और देश में कही भी यदि कुछ ग़लत हो रहा है तो उसका विरोध करना चाहिए.विरोध का तरीका हमारी अपनी स्थिति पर निर्भर करता है.विरोध के लिए झंडा-डंडा ही जरूरी नही हैं.हम किसी भी गडबडी का पत्र लिमामलों खकर भी विरोध कर सकते हैं.समान विचारों वाले लोग एकसाथ हो कर ज्यादा प्रभावी रूप से अपना विरोध जाता सकते हैं.यदि हम कुछ ग़लत देखे तो चुप ना रहें.