पर्यावरण जीवन और पृथ्वी के अस्तित्व से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है. इसके बावजूद अकसर अनजान लोग तो दूर, स्वयम को समझदार मानने वाले लोग भी इसकी उपेक्षा करते हैं.यह भी सही है कि विकसित समाज पर्यावरण को जितना नुकसान पहुँचा रहा है,उतना पिछडे लोग नहीं पहुँचाते.सभ्यता विकसित होती गई और पर्यावरण बिगड़ता गया.स्थिति यह है कि पर्यावर्णीय कारणों से प्राकृतिक चक्र निरंतर असंतुलित होता जा रहा है.यदि हम नहीं सुधरे तो एक के बाद एक प्राक्रतिक प्रकोपो का हमें सामना करना होगा.